यीशु की मुसीबत

यीशु की मुसीबत
जिस दम तुम्हें सुनाऊं
आंखों सेती मैं आंसू
क्योंकर नहीं बहाऊं

दुश्मन जब उसको पकड़े
बे आबरू कैसे किये
वे मानिन्द चोर के बांध के
उसे शामिल अपने लिये

हाय हाय वे उसके घूंसे
तमाचे मारे खींच के
रक्खा था उसके सिर पर
कांटों के ताज को सज के

नरकट के नल को लेके
वे सिर पर उसके मारे
हाय हालत उसकी देखो
ख़ुदा का था दुलारा

मुंह पर भी उसके थूके
और ठट्ठे में उड़ाये
बुराइयां उसकी कर के
सलीब को तब धराये

छ: घंटे पूरे यीशु
रहे इस सख्त अजाब में
तब मर के क़ामिल किया
सब कुछ नजात के बाब में

हाय हाय यह क्या अजीब है
गुनाह तो था हमारा
पर मारा गया यीशु
ख़ुदा का बेटा प्यारा

ईमान अब उस पर लावें
सब लोग जो सुनने वाले
महबूब ओ शाफ़ी जान के
भरोसा उस पर डालें

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