1 .आरास्ता हो ऐ मेरी जान ,
कि बिछा है अब दस्तरख्वान
जांच अपने को आरास्ता हो
खुदावन्द की जियाफत को ।
2 . खुदावन्द मैं हूं खताकार ,
और हूँ हर बात में गुनहगार
मैं बुरे पेड़ की डाली हूँ
और अच्छे फल से खाली हूँ ।
3 . तू अपने कामिल फज़ल से
आरास्तगी को मुझे दे
बे – रिया गम गुनाहों का
और हक ईमान दे मुंजी का
4 . खुदावन्द , मेरे तू हबीब
मैं तेरा बन्द हूँ गरीब ,
मैं भूखा प्यासा आता हूँ
आसूदा हुआ चाहता हूँ ।
5 . मसीह जो निआमत तेरी है ,
उस ही से दिल की सेरी है ,
आरास्ता हो ऐ मेरी जान ,
देख बिछा है एक दस्तरख्वान ।

