लौट आ(दुनिया की भीड़ में) – Subhash Gill

दुनिया की भीड़ में क्यों खो रहा
मिलेगा कुछ भी न फल जो बो रहा
तू आजा घर लौट आ
आ बेटे घर लौट आ
दुनिया की भीड़ मे क्यों खो रहा

१. मे ढूँढू उस भेड़ को जो खो गयी
गुनाहों की जेल में बंद हो गयी…२
तू आजा घर लौट आ
आ बेटे घर लौट आ

२. गुनाहों में था अब तलक , तू जो धसा
मकडी के जाल मे था जो फ़सा…२
तू आजा घर लौट आ
आ बेटे घर लौट आ

३. तू आँखे आब खोल कर सब जाँच ले
तू सच और झूट को अब माप ले…२
तू आजा घर लौट आ
आ बेटे घर लौट आ

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